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Thursday, September 2, 2010

Restoring a sense of control



Many factors can affect the course of a chronic illness, including heredity, lifestyle (e.g., stress, diet, exercise) and even environment. As a result, it's difficult to predict how you may feel from one day to another. The process of living well despite suffering from a chronic illness begins with understanding your illness. What you know about your condition can make a vast difference to how you approach each day. You can start by collecting information about our illness - and remember that there is a wealth of information out there !

Wednesday, September 1, 2010

Acute vs. chronic Illness


Most people are familiar with acute illness, such as appendicitis, typhoid fever or pneumonia, which comes on suddenly and often has an identifiable cause. Generally, such an illness is treatable. Often the individual regains normal health, and usually does not remain sick very long. On the other hand, a chronic illness often begins gradually and may have several causes. Also, rarely is a chronic illness cured, and it usually persists for an indefinite period of time. Diabetes, heart disease and arthritis are examples of chronic illness. Many factors can affect the course of a chronic illness, including heredity, lifestyle (e.g., stress, diet, exercise) and even environment. As a result, it's difficult to predict how you may feel from one day to another.

Learning to Live well with a chronic illness



Illness is the night side of life -Sontag .

In some ways, living with chronic illness is very much like being trapped in a maze - you're never quite certain what lies ahead of you; so, it's easy to lose your perspective. You wander the same path over and over again - totally lost and bewildered. You appear to be alone with no one to show you the way out. There are many questions, but few answers. Which is the most effective treatment ? Who are the best doctors ? What options can be utilized so that the way out can be found ? You need to find your own path, and confronting your illness is a process that must be worked through . This process takes time and effort. If you live with a chronic condition, how you view the path you're on and decide to manage your day-to-day situations can greatly affect your quality of your life.

Tuesday, August 31, 2010

Caring for an older adult is very different from caring for a child



Caring for an older adult is very different from caring for a child. With the passage of time older persons become more dependent on others, not less. On some days, the experience may feel like an emotional roller-coaster ride: you quickly move from pity and guilt to love and on to anger and frustration.

Friday, August 27, 2010

Caregiving: Taking Care of Elders




Thanks to the rapid advances in the field of medicine, more and more people live to a ripe old age, it is increasingly likely that you will be taking care of older relatives at home. While this has always been a traditional practice in the joint Indian family, caregiving can prove to be quite a burden in the modern Indian city. Caregiving refers to a wide range of involvement - everything, from checking in on your relatives every day at their places of residence to providing round-the-clock care for your parents in your own home.
Entering into a caregiving relationship offers a valuable chance to reconnect with someone for whom you care deeply. But as this person ages and becomes more infirm and demanding with each passing day the relationship can become increasingly stressful and, at times, acrimonious. Also, ambivalent or unhappy feelings from the past can re-emerge and cause pain and bitterness, unless you work through them positively. If you're trying to shoulder the burden all alone, the frustrations may overwhelm you. An amicable situation can turn sour and, in some cases, mistreatment or abuse of the older person could be the tragic result. As testimony to this disquieting but indisputable reality, the media is reporting more and more cases of abuse and neglect of the elderly in India. Many parents have even been forced to commit suicide when they have got fed up of the ill-treatment they have received.

Monday, August 23, 2010

Growing Old






Growing old is a bad habit which a busy man has no time to form. - - Andre Maurois.
The best way to live to a ripe old age entails possessing the right genes. In other words, if your parents and grandparents have led long lives, you are likely to do so too! However, the fact remains that while you cannot choose your parents, you can, nevertheless, increase the chances of your growing old healthily!

Wednesday, May 26, 2010

HealthTip Of The Day

When you’re feeling stressed out, concentrate on dropping your shoulders to release tension

Wednesday, January 21, 2009

मैं डॉक्टर के नुस्खे कैसे समझूँ

मैं डॉक्टर के नुस्खे कैसे समझूँ

आपके डॉक्टर के नुस्खे कैसे पढ़ें - समझें :-

आपके अधिकतर डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन डॉक्टर के नाम, पते और फोन नम्बर के साथ छपे पैड पर होते हैं । उसमें आपका नाम, पता और उम्र और डॉक्टर के हत्साक्षर, आपके लक्षण और अनुमानित निदान, परीक्षण (टेस्ट) की सलाह और आपकी चिकित्सा का विवरण होता है । चिकित्सा का विवरण इस प्रकार होता है :-

  • दवा का नाम ।
  • दवा की मात्रा ।
  • दवा कितनी बार ली जाए ।
  • दवा कब ली जाए ।
  • दवा कैसे ली जाए ।
  • दवा कब तक ली जाए ।

साधारण उपयोगी चिकित्सकीय संक्षप्तिकरण शब्द :-

ग्रीक और लैटिन भाषा से लिये शब्दों और चिन्हों का उपयोग अक्सर डॉक्टर करते हैं । यदि आप इसे नहीं समझ पाते तो डॉक्टर अथवा दवा विकेता ही इसे समझ लेते हैं । क्योंकि आपको मौखिक निदेश प्राय याद नहीं रह पाते और घर आने पर पुन आपको इस संदर्भ की जरूरत पड़ सकती है ।

यदि अंग्रेजी में आपको समझ में नहीं आता तो जरूरी है कि आप डॉक्टर से ही हिन्दी या मराठी में निदेशों को लिखने को कहें ।

दवा कितनी बार ली जाए :-

इससे पता चलता है कि दिन में कितनी बार दवा लेना है ।

o.d. दिन में एक बार
b.d./b.i.d. दिन में दो बार
t.d.s. दिन में तीन बार
q.i.d. दिन में चार बार

दवा कब लेवें :-

यह दवा के समय और भोजन के संदर्भ में दर्शाता है ।

a.c. भोजन के पहले
h.s. सोने के पहले
i.n.t. भोजन के बीच में
p.c. भोजन के बाद

कितनी मात्रा में दवा लेवें :-

यह दवा कि कितनी मात्रा दर्शाता है ।

caps कैपसूल
gtt. ड्राप (बूंद)
tab टैबलेट (गोली)
mg. मिली ग्राम
mcg. माईक्रो ग्राम
ml. मिली लीटर
tbsp टेबल स्पून (15 मि.ली.)
tsp. चाय का चम्मच (5 मि.ली.)
i, ii, iii, iiii दवा की मात्रा की संख्या (1,2,3,4)

दवा का उपयोग कैसे करें :-

प्राय डॉक्टर साधारण भाषा में R या Ld लिखकर साईड लिखते हैं । इसके आलावा भी कई सीनियर डॉक्टर संक्षिप्त शब्दों का उपयोग करते हैं ।

ad सीधा कान al दायां कान
od सीधा आँख os दायीं आँख
ou दोनों आँखें c या o साथ
s या o बगैर po मौखिक
sl जीभ के नीचे top चमड़ी पर लगाने के लिये

सामान्य प्रिसक्रिप्शन कैसा होता है - उदाहरण -

डॉ. अ.ब.स. एम.डी. (मेडिसिन) पता व सम्पर्प नम्बर

रोगी का नाम : क्षत्रज्ञ उम्र : लिंग : तारीख

मुख्य शिकायत/लक्षण

लक्षण की अवधि

अन्य उपस्थित रोग

पारीवारिक इतिहास

चिकत्सकीय परीक्षा - ज्वर, ब्लड प्रेशर

निदान

परीक्षण की सलाह

उपयोग करने की दवा

डॉक्टर के हस्ताक्षर

दवा के उपयोग में सावधानियाँ

दवा के उपयोग में सावधानियाँ
सावधानी क्यों बरतें ?

बीमारी और स्वास्थ्य की समस्या से छुटकारा पाने के लिये दवा लेना जरूरी है । मामुली सिर दर्द या बुखार के लिये सीधे दुकान से दवा ली जा सकती है अथवा रोगी की पर्याप्त जाँच के बाद डॉक्टर विशिष्ट निदान कर दवा देता है ।

किसी भी प्रकार से दवा रोग के लक्षणों से आराम तो दिलाती है । कभी सही मात्रा व सही योग में दवा न लेने पर इससे कई विभिन्न समस्याएँ पैदा हो जाती है । इसलिए भले ही आप दवा की दुकान से सीधे खरीद कर अथवा डॉक्टर के परामर्श के बाद दवा का उपयोग करें तो पूरी सावधानी बरतना जरूरी है ।
दवा के बारे में आप क्या विवरण पढ़ते और समझते हैं :-

औषधी का नाम, उसके ब्राण्ड का नाम, मात्रा, उसकी अन्य उपयोगी फीचर जैसे सस्टेन्ड या एक्सटेन्डेड अवधि का दवा ।

दवा का वांछित असर और दवा का असर कैसे होगा इसकी जानकारी जैसे - पैरासिटामाल - बुखार कम करती है न कि इन्फैक्शन और इसका लाक्षणिक प्रभाव दो या तीन बार लेने पर होता है ।

सही तरीके से दवा कितनी बार और किस तरीके से लेना है । जैसे - दूध के साथ (भोजन के पहले) या भोजन के बाद रात में (जैसे निद्राकारक दवा), चबाकर लेना है या निगलना है आदि ।

दवा के अवांछित प्रभाव और उन्हें कैसे कम किया जा सकता है । जैसे - एलर्जी शामक दवा लेने से सुस्ती आती है तो उन्हें रात में अथवा भोजन के बाद लिया जाय ।

दवा के संभावित अन्तर-प्रतिक्रिया जैसे - भोजन, मध्यपान अथवा अन्य दवा के साथ प्रतिक्रिया व इनसे कैसे बचा जाय । जैसे - हैलोपेरिडॉल और मद्यपान या माओ-इनहिबिटार के साथ बी.पी. की प्रतिक्रिया आदि ।

दवा उपयोग की अवधि में बचने की प्रतिक्रियाएँ जैसे एन्टी हिस्टामिन या कोडीन युक्त खाँसी का सीरप वाहन का चालन न करें ।
दवा खरीदने और उपयोग में बरती जाने वाली सावधानियाँ :-

लेबल को ध्यान से पढें और उसकी औषधी को समझें, दवा का नाम पढें (कई औषधि स्पेलिंग और उच्चारण में एक जैसी लगती है) । दवा विकेता से सही मात्रा और अवधि की जानकारी ले लेवें ।

स्वयं से दवा कभी न लें । जैसे, दवा की मात्रा स्वयं ही घटाएँ या बढाएँ नहीं । प्रभाव न करने पर या तकलीफ होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मधुमेह की दवा कभी न रोकें ।

बिना डॉक्टर की सलाह के सीधी खरीदी दवा के साथ डॉक्टर की लिखी दवा का एक साथ उपयोग न करें । यदि आप किसी प्रकार की घरेलू दवा या आयुर्वेदिक दवा ले रहे हो तो डॉक्टर को इसकी सूचना देवें क्योंकि कभी कभी ऐसी दवाएँ एलोपेथी दवा के साथ गंभीर प्रतिक्रिया कर सकती है । यदि डॉक्टर को इसका पता न लगे तो वह आपकी चिकित्सा भी नहीं कर सकता ।

पक्के तौर पर घर में आपके अलावा किसी अन्य सदस्य को आपकी दवा की जानकारी होनी चाहिये । ताकि गंभीर समस्या होने पर वह डॉक्टर को समझा सके ।

आपको जैसा बताया गया है उसी तरीके से दवा लेवें, गोली को कभी तोड़े, चूरा न करें अथवा किसी सीरप में न घोलें । ऐसा करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लेवें । कभी कभी दवा का या तो असर नहीं होता अथवा अधिक प्रतिक्रिया भी हो सकती है । कभी-कभी दूध में भी घोलने से ऐसा हो सकता है ।

दवा की एक्सपायरी (प्रभावी काल) को सावधानी से देखें । चाहे वह आपके घर में हो अथवा खरीद रहे हों तारीख जरूर देखें । तारीख के बाद ही दवा के उपयोग के अवांछित दुष्परिणाम हो सकते हैं ।

अन्य किसी के लिये लिखि दवा, भले ही उसके लिये अच्छी हो आप उसे लेने का दुस्साहस न करें । आपके शरीर की जरूरत, रोग के लक्षण और दवा की प्रतिक्रिया सबके लिये अलग-अलग होती है । इसलिए डॉक्टर की सलाह से बच कर शार्टकर्ट मारकर अपने जीवन को धोके में न डालें ।

आपके डॉक्टर को आपकी एलर्जी आदि की पूरी जानकारी देवें और स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे ब्लड प्रेशर, मधुमेह, एपिलेप्सी, हृदय रोग, गुर्दे का रोग, अस्थमा, गेस्ट्राइटिस आदि की जानकारी और कौनसी दवा आप ले रहे हैं पूरी बात अपने डॉक्टर को बताएँ ।

दवा को अच्छी तरह, सीधी धूप से बचाकर, शुष्क स्थान पर सुरक्षित रखें । तीखी गंध वाली दवा से दूर रखें । जब भी दवा लें तो उसका कवर पढ लेवें । अंधेरे में दवा कभी न लेवें । जैसे भूल जाने पर आधी नीन्द से उठकर कभी दवा न लेवें ।

सामान्यत दवा लेते समय मध्यपान न करें क्योंकि शराब से दवा के अवांछित प्रभाव हो सकते हैं जोकि कभी-कभी अत्यन्त गंभीर होते हैं । याद रखें आप अपने डॉक्टर से जरूर कहें कि आप नियमित शराब पीते हैं या शराबी हैं क्योंकि आपका लीवर शराबग्रस्त होता है और दवा के प्रभाव में अंतर आ सकता है ।

बच्चों की बदमिजाजी

बच्चों की बदमिजाजी

बच्चे बदमिजाज होते हैं । यह बदमिजाजी सामान्य रुदन, जमीन पर लोटने से लेकर जोरों से चीखना, बातें मारना, ऊपर-नीचे कूदना-फाँदना और कभी कभी उत्तेजित व्यवहार तक रह सकती है । बच्चों के इस व्यवहार को अपनी स्वायतत्ता बताना या अभिभावकों से आजादी पाना - ऐसा समझा जा सकता है ।

बच्चों में बदमिजाजी कब होती है :-

  • जब बच्चे नीन्द न होने से या भूख से थक जाते हैं ।
  • अचानक नापसन्द बदलाव और वातावरण जैसे तलाक या मानसिक अनिश्चितता ।
  • बच्चे मौखिक अभिव्यक्ति नहीं कर सकते इसलिए अपनी संवेदनाएँ - बदमिजाजी से दर्शाते हैं ।
  • कई बार इस बदमिजाजी से घर के बड़ों का ध्यान आकर्षित न होता है ।
  • बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं वे कुछ आजाद रहना और अपना निर्णय खुद लेना चाहते हैं ।
  • कठिन कामों, जैसे स्कूल में अच्छे अंक न प्राप्त करने अथवा प्रतियोगिता में विफल होने पर, बच्चे निराश होकर बदमिजाजी करने लगते हैं ।
  • कभी उनकी मनचाही चीज जैसे - चॉकलेट, मिठाई न मिलने पर भी बच्चे बदमिजाजी करने लगते हैं ।

इससे कैसे निपटें :-

सबसे महत्वपूर्ण है, बच्चे को उसकी बदमिजाजी की सजा कभी न देवें । सजा के भय से बच्चा अपनी संवेदना प्रकट ही नहीं कर सकता और इसके दुष्पिरणाम हो सकते हैं ।

यदि आपका बच्चा बदमिजाजी कर रहा है तो आप इस पर ध्यान न दें क्योंकि वह आप द्वारा मना करने से विचलित है । आपके द्वारा ध्यान न देने पर बच्चा समझता है कि बदमिजाजी से कोई हल नहीं निकलेगा । कई बच्चे कुछ और करने लगते हैं, इसके परिणाम अच्छे होते हैं ।

आप निराश होने पर भी अपना नियंत्रण न खोयें । क्योंकि आप बच्चों के सताने का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं । कभी सजा न देवें और न ही आपा खोकर चीखें । याद रखें, यदि आप अपना नियंत्रण खोते हैं तो दूसरी ओर आपका बच्चा उसे झेल रहा है । और वह बदमिजाजी में भी इसी व्यवहार को सीख रहा है ।

बच्चे की बदमिजाजी रोकने के लिये कभी भी उसे फुसलायें नहीं । इससे उसमें बदमिजाजी बढेगी और वह समझेगा ऐसा करने से उसे कुछ न कुछ तो मिलेगा ।

बदमिजाजी से छुटकारा :

  • बच्चों को तनावपूर्ण स्थिति से दूर रखें और जहाँ ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है उससे भी दूर रखें ।
  • यदि आप बदमिजाजी की शुरुआत होती देखें तो बच्चे का ध्यान उसकी पसंद की ओर आकर्षित करें ।
  • बच्चों को बारबार नीन्द आने का ध्यान रखें और देखें कि बच्चों को कई अन्य स्वास्थ्य समस्या तो नहीं हैं ।
  • जब कभी बच्चे भूखे हों तो उन्हें तुरन्त पौष्टिक आहार मिलना चाहिये ।
  • बच्चों को उसकी साधारण पसंद का अवसर देवें । जैसे - नाश्ते में उसे सैण्डविच में अण्डा या सब्जी पसंद है या पहनने के लिये दो जोडी कपडे चाहिये जो कि आपको भी मान्य हो । इस प्रकार बच्चे भी स्वतंत्र महसूस करते हैं ।
  • अधिकांश बच्चों की बदमिजाजी 3-4 साल की उम्र तक कम हो जाती है । यदि आपको लगे कि बच्चे भी बदमिजाजी उसके कोई अन्य भावुकता का परिणाम है तो तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लें ।
  • बच्चे की बदमिजाजी का हल ढूंढने में याद रखें आप उसके गुस्से का हल निकालकर रहे हैं ना कि उसकी गलतियाँ निकाल रहे हैं ।

कुछ महत्वपूर्ण युक्तियाँ ये है -

  • न सजा दें, न ईनाम दें ।
  • शान्त रहें, जहां तक हो सके अवहेलना करें । प्रतिक्रिया करने से बच्चा समझेगा बदमिजाजी अच्छा हथियार है ।
  • बच्चे को सुरक्षित और हो सके तो अकेला रखें ।
  • बच्चों को आपके व्यवहार की निन्दा न करने दें । यह तो केवल आपका बच्चा ही इसका पात्र है ।

घर पर :-

  • जब बच्चा घर पर बदमिजाजी करे तो उसे शान्ति से उसके रूम में अथवा उसके बिस्तर पर अकेले छोड़ देवें ।
  • और फिर रूम बन्द कर उसे अकेले तब तक छोड़ देवें जब तक वह चीखना बन्द न कर दे ।
  • यदि बच्चे को अकेले छोड़ना असुरक्षित लगे, बच्चे की बदमिजाजी की पूरी अवहेलना कर देवें, उससे आँख तक न मिलाएँ ।
  • बच्चा शान्त होने पर उससे बात करें और उसके व्यवहार के बारे में उसे समझायें ।

सार्वजनिक जगहों पर :-

  • यदि बच्चा सार्वजनिक स्थल पर बदमिजाजी करे तो उसे किसी एकान्त जगह ले जायें ।
  • सबसे अच्छी जगह आपकी कार है । बच्चे को वहां ले जायें और बैठा दें । आप कार के बाहर खड़े रहें या कार ही में बैठ जायें, किन्तु बदमिजाजी के प्रति प्रतिक्रिया न करें । बदमिजाजी शान्त होने पर बच्चे से बात करें समझायें और अपनी सामान्य क्रिया में लौट आयें ।
  • यदि आप सार्वजनिक स्थल से हट नहीं सकते तो किसी भी तरीके से स्थिति को सम्भालें और बच्चे की बदमिजाजी की अवहेलना करें ।
  • लोगों की बातों निगाहों की ओर ध्यान न देवें ।
  • आप शान्त रहें ।
  • एक बार जगह से हटने पर बच्चे को उसके व्यवहार के बारे में समझायें ।

बच्चे को समझाना :-

  • बच्चा शान्त होने पर तुरंत उसे समझायें ।
  • बच्चे को पूरी घटना समझायें और बतायें की आपको गुस्सा क्यों आया, आपने पुकारा किया आदि । इस तरीके से बच्चा सारा घटनाक्रम समझेगा ।
  • बदमिजाजी की घटनाओं से बचने का प्रयास करें ।
  • बदमिजाजी सामान्य व्यवहार नहीं है, ऐसा बच्चे को समझायें । बच्चे को साफ समझायें कि अच्छे बच्चे ऐसी हरकत नहीं करते इसका बच्चे पर प्रभाव पड़ेगा और वह बदमिजाजी नहीं करेगा ।
  • बच्चे को बतायें कि बदमिजाजी के बदले वह अपनी भावना आपको कैसे प्रकट कर सकता है । ऐसा अपनी भावना प्रकट करने का सही तरीका समझाएँ ।
  • बच्चे को विश्वास दिलायें की उसे जब भी गुस्सा आये या निराश हो या कोई समस्या हो तो वह सीधे आपसे कह सकता है । आखिर आप उसकी मदद के लिये ही तो है ना ।
  • ऐसा करने से बच्चे जल्दी समझ जाते हैं । याद रखें बच्चे बड़ों से जल्दी समझते हैं ।
  • इस प्रकार का व्यवहार आपको बार-बार करना पड़ेगा । बच्चे की बदमिजाजी सुधारने में समय लगता है ।

कुछ महत्वपूर्ण वेबसाईट :-

  • www.kidshealth.org / parent / immotion / behaviour / tantrum.html
  • www.betterhealth.vip.gov.au / BHCV2 / bharticles.nsf / pages.tamper tantrums? open document
  • www.vaisngchildren.net.au / articles / temper tantrum.html

Wednesday, August 13, 2008

दिल के दौरे के बाद ! & How We Did It


Thanks to to Google Translate and Google Transliteration, we can now convert useful health education material to various international languages. Using a Microsoft Publisher template for Brochures as a base, we at HELP have been successful in translating patient education handouts in Hindi - National language in India. The cartoon pictures have been downloaded from http://www.clipart.com/

After creating the required material we saved the Microsoft Publisher file as a JPEG file which we have uploaded on our blog.

Watch out for more interesting brochures in Hindi. We also welcome any suggestions/ideas to do it better.